अभिसारी तथा अपसारी चिंतन में अंतर For CTET, B.ed & D.El.Ed

By | October 7, 2020

अभिसारी तथा अपसारी चिंतन में अंतर

हमलोग आज के इस लेख में अभिसारी तथा अपसारी चिंतन में अंतर को जानेंगे। अभिसारी तथा अभिसारी चिंतन में अंतर को जानने से पहले हम लोग जानते हैं कि अभिसारी चिंतन तथा अभिसारी चिंतन क्या होता है? तो चलिए जानते हैं कि अपसारी चिंतन(Divergent Thinking)  तथा अभिसारी चिंतन(Convergent Thinking) क्या है?

अभिसारी चिंतन (Convergent Thinking) क्या है?

अभिसारी चिंतन एक बिंदु पर केंद्रित होता है। इस प्रकार के चिंतन में कल्पना करने की आवश्यकता नहीं होती है।यह  बुद्धि को बढ़ावा नहीं देती है। अभिसारी चिंतन पर तथ्यों आधारित होती है। अभिसारी चिंतन से किसी समस्या के हल निकालने पर केवल और केवल एक निकलता है। जब कोई बालक पहले से बने नियम और तथ्यों के आधार पर किसी समस्या का हल निकालता है तो उसके द्वारा किया गया चिंतन अभिसारी चिंतन (Convergent Thinking) कहलाता है।

अपसारी चिंतन (Divergent Thinking) क्या है?

अपसारी चिंतन को सृजनात्मक चिंतन भी कहा जाता है। अपसारी चिंतन या सृजनात्मक चिंतन खोज, अविष्कार तथा मौलिकता को जन्म देती है।
जब किसी व्यक्ति के सामने कोई समस्या रखी जाती है तो वह व्यक्ति उस समस्या के समाधान के लिए अपने कल्पना शक्ति का प्रयोग करता है तथा उस समस्या का एक से अधिक हल प्रस्तुत करता है। इस प्रकार के चिंतन को अपसारी चिंतन या सृजनात्मक चिंतन (Divergent Thinking) करते हैं।
अपसारी चिंतन out-of-the-box चिंतन पर आधारित है out-of-the-box चिंतन का मतलब होता है कि सामान्य सोच से अलग सोच पैदा कर किसी चीज के बारे में सूचना।

अभिसारी तथा अपसारी चिंतन में अंतर

              अपसारी चिंतन             अभिसारी चिंतन
1. अपसारी चिंतन खोज, अविष्कार तथा मौलिकता को जन्म देती है। 1. अभिसारी चिंतन एक ही बिंदु पर केंद्रित रहती है यह खोज का अवसर प्रदान नहीं करती है।
2. इस प्रकार के चिंतन से बालक सृजनशील बनते हैं। 2. इस प्रकार के चिंतन से बालक में रटने की प्रवृत्ति उत्पन्न होती है।
3. अपसारी चिंतन से बालक के कल्पना शक्ति एवं बुद्धि का विकास होता है। 3. अभिसारी चिंतन से बालक के कल्पना शक्ति एवं शुद्धि पर कोई सकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है।
4. अपसारी चिंतन के फलस्वरूप किसी भी समस्या का एक से अधिक हल निकलता है। 4. इस प्रकार के चिंतन से किसी भी समस्या का केवल और केवल एक ही हल निकलता है।
5. इस प्रकार का चिंतन किसी निश्चित तथ्य पर आधारित नहीं होती है। 5. अभिसारी चिंतन एक निश्चित तथ्य पर आधारित होती है।
6. अपसारी चिंतन से एक ही समस्या का हल अलग-अलग विधि द्वारा निकाला जा सकता है। 6. अभिसारी चिंतन से किसी समस्या का हल सिर्फ ज्ञात विधि द्वारा ही निकाला जा सकता है।
7. इस प्रकार के चिंतन के द्वारा खोजा गया समाधान मुक्त अंत वाला होता है। 7. इसके द्वारा खोजा गया समाधान बंद अंत वाला होता है।
8. अपसारी चिंतन  एक बिंदु पर केंद्रित नहीं होता है। यह किसी समस्या का पूरा अवलोकन करने के बाद नतीजा प्रदान करता है। 8. अभिसारी चिंतन सिर्फ एक बिंदु पर केंद्रित होती है।
9. अपसारी चिंतन द्वारा किसी समस्या के समाधान में अधिक समय लगता है। 9. अभिसारी चिंतन द्वारा किसी समस्या का समाधान जल्द निकल जाता है।
10. अपसारी चिंतन का हल उतना सटीक नहीं होता है। 10. अभिसारी चिंतन का हल शुद्ध और सटीक होता है।

 

हम लोगों ने इस लेख में जाना कि अभिसारी चिंतन क्या होता है, अपसारी चिंतन  क्या होता है? साथ ही साथ यह भी जाना कि अभिसारी तथा अपसारी चिंतन में अंतर क्या-क्या है।

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