वातावरण किसे कहते हैं? वातावरण के परिभाषा, अर्थ एवं वातावरण का प्रभाव।

वातावरण का अर्थ

Environment वातावरण को पर्यावरण भी कहते हैं। पर्यावरण दो शब्दों से मिलकर बना है परि एवं आवरण।
परि का अर्थ होता है – चारों ओर, तथा आवरण का अर्थ होता है गिरा हुआ या ढकना। इस प्रकार से पर्यावरण का अर्थ हुआ चारों ओर से घेरने वाला।

कोई भी प्राणी या मनुष्य जलवायु, वनस्पति, पहाड़, पठार, नदी तथा अन्य वस्तु इत्यादि से गिरा हुआ होता है यह सारी वस्तुएं मिलकर पर्यावरण का निर्माण करते हैं।

इन सारी वस्तुओं को वातावरण या पोषण के नाम से भी जाना जाता है।

वातावरण के परिभाषा

सरल शब्दों में कह सकते हैं कि -हमारे आस-पड़ोस की वे सारी वस्तुएं जिनसे हम गिरे हुए होते हैं पर्यावरण या वातावरण कहलाता है।

वैज्ञानिकों द्वारा दिया गया वातावरण की परिभाषा

एनास्टैसी के अनुसार

पर्यावरण वह हर चीज है, जो व्यक्ति के जीवन के अलावा उसे प्रभावित करती है।

हालैण्ड एवं डगलास के अनुसार

जीव जगत के प्राणियों के विकास, परिपक्वता, प्रकृति, व्यवहार तथा जीवन शैली को प्रभावित करने वाले बाह्य समस्त शक्तियों, परिस्थितियों तथा घटना को पर्यावरण में सम्मिलित किया जाता है और उन्हीं की सहायता से पर्यावरण का वर्णन किया जाता है।

वातावरण किसे कहते हैं?

वातावरण का प्रभाव

शारीरिक अंतर का प्रभाव

मनुष्य के शारीरिक लक्षण वैसे कहा जाए तो वंशानुगत या अनुवांशिकता का देन होता है, किंतु इस पर वातावरण का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जाता है। जैसे-पहाड़ी क्षेत्र में रहने वाले लोग का कद छोटा होता है, जबकि मैदानी क्षेत्र में रहने वाले लोगों का शरीर लंबा एवं गठीला होता है। अनेक वीडियो से निवास स्थान परिवर्तन करने के बाद उपरोक्त लोगों की कदवा मोडक में अंतर वातावरण के प्रभाव के कारण देखा गया है।

प्रजाति की श्रेष्ठता पर प्रभाव

कुछ प्रजातियों वातावरण से अधिक प्रभावित होते हैं। उन पर जातियों के पास जैसी वातावरण उपलब्ध होती हैं वह उसी प्रकार से अपने आप को विकसित कर पाते हैं। जैसे यदि कोई महान व्यक्ति के पुत्र को ऐसी जगह पर छोड़ दिया जाता है जहां शैक्षिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक वातावरण उपलब्ध नहीं होता है, तो उसका अपने पिता की तरह महान बनना संभव नहीं हो सकता है।

मानसिक विकास पर प्रभाव

वातावरण का प्रभाव मानसिक विकास पर भी पड़ता है।
गोर्डन नामक मनोवैज्ञानिक का मत है कि उचित सामाजिक और सांस्कृतिक वातावरण नहीं मिलने पर मानसिक विकास की गति धीमी हो जाती है।

वातावरण किसे कहते हैं?

बालक पर बहुमुखी प्रभाव

पर्यावरण बालक पर बहुमुखी प्रभाव डालता है। जैसे बालक के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, संवेगात्मक आदि सभी अंगों पर प्रभाव डालता है। उदाहरण स्वरूप एक बार एक बालक को बहन जा उठा ले गया था और उसका पालन पोषण जंगली पशुओं के बीच में हुआ था। बहुत दिनों बाद जब से ढूंढा गया तब उसकी आयु में 11 वर्ष की थी। उसकी आकृति पशुओं के जैसी हो गई थी। वह पशुओं की तरह चलता था और वह कच्चा मांस भी खाता था। उसमें मनुष्य जैसे बोलने और विचार करने की शक्ति नहीं थी।

वातावरण संबंधी कारक

वातावरण संबंधी कुछ महत्वपूर्ण कारक निम्नलिखित है

भौतिक कारक

इसके अंतर्गत प्रकृति एवं भौगोलिक परिस्थितियां आती है। मनुष्य के विकास पर जलवायु का प्रभाव पड़ता है जैसे-ठंडे प्रदेश के लोग सुंदर, गोरे, सुडोल, स्वास्थ्य एवं बुद्धिमान होते हैं जबकि गर्म प्रदेश के लोग काले, चिड़चिड़ी तथा आक्रमक स्वभाव के होते हैं।

सामाजिक कारक

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है इसीलिए मनुष्य पर समाज का प्रभाव अधिक दिखाई देता है। सामाजिक व्यवस्था, समाज की रहन सहन, परंपराएं, रीति रिवाज तथा अन्य बहुत से तत्व हैं जो मनुष्य के शारीरिक, मानसिक एवं बौद्धिक विकास को किसी ना किसी रूप से अवश्य प्रभावित करते हैं।

आर्थिक कारक

आर्थिक कारक का अर्थ जहां पर धन से है। धन से केवल सुविधाएं ही प्राप्त नहीं होती है बल्कि इससे पौष्टिक चीजें खरीदी जा सकती है जिससे मनुष्य का विकास अच्छी गति से होता है। आर्थिक वातावरण मनुष्य की बौद्धिक क्षमता को प्रभावित करता है। इसका प्रभाव सामाजिक विकास पर भी पड़ता है।

सांस्कृतिक कारक

सांस्कृतिक कार्य के अंतर्गत धर्म, पूजा पाठ, संस्कार, आचार्य विचार, रहन सहन, खानपान इत्यादि आते हैं। अगर यह सभी चीजें बालों को सही समय पर तथा उचित मात्रा में प्राप्त होता है या नहीं होता है इन दोनों से बालको का विकास प्रभावित होता है।

हम लोगों ने जाना कि वातावरण किसे कहते हैं, वातावरण का अर्थ, वातावरण के परिभाषा तथा वातावरण का प्रभाव क्या है?

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