संज्ञान तथा संवेग क्या है?

संज्ञान तथा संवेग क्या है?

आज हमलोग बाल मनोविज्ञान के शिक्षाशास्त्र के अंदर आने वाले Toppic संज्ञान तथा संवेग के बारे में अध्ययन करेंगे चलिए हम लोग देखते हैं कि संज्ञान तथा संवेग क्या है तथा इसका बालकों के शिक्षा पर कैसा प्रभाव पड़ता है

संज्ञान किसे कहते हैं?

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार :- संज्ञान का अर्थ “समझ” या “ज्ञान” होता है। शिक्षण के प्रक्रियाओं में अधिगम का मुख्य केंद्र संज्ञानात्मक क्षेत्र होता है। इस क्षेत्र में अधिगम उन मानसिक क्रियाओं से जुड़ा होता है जिनमें पर्यावरण से सूचना प्राप्त की जाती है। इस प्रकार इस क्षेत्र में अनेक क्रियाएं होती है, जो सूचना प्राप्ति के प्रारंभ होकर शिक्षार्थी के मस्तिष्क तक चलती रहती है यह सूचनाएं सुनने या देखने के रूप में होती है।

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संज्ञान के संदर्भ में महान मनोवैज्ञानिकों का विचार

स्टाट के अनुसार, संज्ञानात्मक संरचना बाहरी वातावरण में विचारपूर्वक, प्रभावपूर्ण ढंग से तथा सुविधा के अनुसार कार्य करने की क्षमता है।

हिलगार्ड के अनुसार – किसी व्यक्ति ने स्वयंअपने बारे में तथा अपने पर्यावरण के बारे में विचार, ज्ञान, व्याख्या, समझ तथा धारणा अर्जित की हो वही संज्ञान है।

संवेग (Emotion) किसे कहते हैं?

अंग्रेजी भाषा के शब्द Emotion का हिंदी रूपांतरण है इस शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के इमोवेयर शब्द से हुई है जिसका अर्थ है उत्तेजित होना

इस प्रकार से संवेग को व्यक्ति की उत्तेजित दशा कहते हैं इस प्रकार से संवेग शरीर को उत्तेजित करने वाली एक प्रक्रिया है

संज्ञान तथा संवेग क्या है?

मनुष्य अपने दैनिक जीवन में प्रत्येक दिन की जिंदगी में सुख, दुख , क्रोध, प्रेम, घृणा ,आदि का अनुभव करता है मनुष्य ऐसा व्यवहार किसी उत्तेजना की अवस्था में करता है यह अवस्था संवेग कहलाती है

संवेग के संदर्भ में महान मनोवैज्ञानिकों का विचार

वुडवर्ड के अनुसार, ” संवेग व्यक्ति की उत्तेजित दशा है”

ड्रवर के अनुसार,” संवेग प्राणी के एक जटिल दशा है जिसमें शारीरिक परिवर्तन भावना के कारण उत्तेजित दशा और एक निश्चित प्रकार का व्यवहार करने की आवृत्ति निहित रहती है

जे एस रॉस के अनुसार,” संवेग चेतना की वह अवस्था है जिसमें रागात्मक तत्व की प्रधानता रहती है

संवेग की प्रकृति

हममें से प्रत्येक व्यक्ति अपने अच्छे और बुरे अनुभवों के प्रति दृढ़ का अनुभव करता है संवेग का उदाहरण है- खुश होना, दुखी होना, उदास होना, शर्मिंदा होना आदि प्रतिदिन की जीवन को प्रभावित करता है

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