आलोचनात्मक चिंतन (Critical Thinking) क्या है? आलोचनात्मक चिंतन के अर्थ,परिभाषा एवं महत्व

हमारे "CTET PREPRATION" Whatsapp ग्रुप को अभी Join करें......CLICK HERE

CTET एवं TET के Exam में “आलोचनात्मक चिंतन (Critical Thinking)” से प्रत्येक वर्ष प्रश्न पूछे जाते हैं। इसीलिए हम लोग इस लेख में आलोचनात्मक चिंतन से जुड़े सभी बातों का अध्ययन करेंगे। हमलोग जानेंगे कि आलोचनात्मक चिंतन (Critical Thinking) क्या है? आलोचनात्मक चिंतन का परिभाषा एवं आलोचनात्मक चिंतन की आवश्यकता क्या है? इसके साथ साथ हम लोग यह भी जानेंगे की आलोचनात्मक चिंतन के अर्थ एवं महत्व कौन-कौन से हैं?

आलोचनात्मक चिंतन का शाब्दिक अर्थ

आलोचनात्मक चिंतन का शाब्दिक अर्थ है- किसी विषय वस्तु पर आलोचना के साथ चिंतन करना। अर्थात किसी विषय वस्तु के अर्थ, अवधारणा, पक्ष, विपक्ष, उसके गुण, अवगुण इत्यादि सभी पक्षों पर विचार करना ही आलोचनात्मक चिंतन का अर्थ है।

आलोचनात्मक चिंतन की परिभाषा

“आलोचनात्मक चिंतन अच्छे निर्णय के लिए कौशलयुक्त तथा उत्तरदायित्व पूर्ण चिंतन है”

राॅबर्ट एनिस के अनुसार- आलोचनात्मक चिंतन क्या करना है या किस पर विश्वास करना है, का कारण युक्त तथा प्रभावी चिंतन है।

आलोचनात्मक चिंतन की आवश्यकता एवं महत्व

  • आलोचनात्मक चिंतन व्यक्तित्व के निर्माण तथा व्यक्तिगत विकास के लिए आवश्यक है।
  • यह आलोचनात्मक क्षमता के विकास में भी आवश्यक हैं।
  • उच्च स्तरीय निर्णय लेने तथा समस्या समाधान करने की क्षमता के विकास में भी आलोचनात्मक चिंतन अहम भूमिका निभाता है।
  • वैज्ञानिक चिंतन तथा तार्किक चिंतन के विकास में भी आलोचनात्मक चिंतन की आवश्यकता होती है।
  • छात्रों में विवेचना, मूल्यांकन इत्यादि कौशल का विकास करने में भी आलोचनात्मक चिंतन की आवश्यकता पड़ती है।

आलोचनात्मक चिंतन की विशेषताएं एवं लाभ

  • आलोचनात्मक चिंतन निष्पक्षता प्रदर्शित करता है। अर्थात यह गुण एवं दोष का निष्पक्ष मूल्यांकन करता है।
  • आलोचनात्मक चिंतन वैज्ञानिक प्रकृति के होते हैं। इसमें कारण कार्य तथा संबंध का विशेष महत्व होता है।
  • आलोचनात्मक चिंतन व्यक्तिगत क्षमता तथा विविधता का पोषक है।
  • यह वस्तुनिष्ठता तथा विषनिष्ठता में सामंजस्य को प्रोत्साहन देता है।
  • आलोचनात्मक चिंतन समाज को पूर्वाग्रह मुक्त बनाने में भागीदारी निभाता है।

दैनिक जीवन में आलोचनात्मक चिंतन का महत्व

  • आलोचनात्मक चिंतन व्यक्तिगत गलतियों से बचने में सहायक है।
  • यह उचित निर्णय लेने तथा क्रियान्वयन में सहायक है।
  • आलोचनात्मक चिंतन स्वतंत्र व्यक्तिगत सोच का निर्माण करता है।

उपरोक्त लेख में हम लोगों ने पढ़ा कि आलोचनात्मक चिंतन (Critical Thinking) क्या है? आलोचनात्मक चिंतन का परिभाषा एवं आलोचनात्मक चिंतन की आवश्यकता क्या है? इसके साथ साथ हम लोग यह भी जानेंगे की आलोचनात्मक चिंतन के अर्थ एवं महत्व कौन-कौन से हैं? मैं उम्मीद करता हूं कि यह लेखआपको पसंद आई होगी तथा यह आपके लिए उपयोगी भी होगा। इसी तरह के अन्य लेख को पढ़ने के लिए पढ़ते रहिए…..RKRSTUDY.NET

CTET Preparation Group पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) क्या हैCLICK HERE
CTET PREPRATION WHATSAPP GROUP Join Now