अभिसारी चिंतन तथा अपसारी चिंतन For CTET, B.ed & D.El.Ed

अभिसारी चिंतन तथा अपसारी चिंतन क्या है?

rkrstudy.net में आप सभी का स्वागत है। आज हम लोग इस पोस्ट के माध्यम से यह जानेंगे कि अभिसारी चिंतन तथा अभिसारी चिंतन क्या है? अभिसारी चिंतन तथा अपसारी चिंतन का परिभाषा क्या है? अभिसारी चिंतन तथा अपसारी चिंतन को जानने से पहले हम लोग चिंतन क्या है? इसके बारे में जानते हैं।

चिंतन क्या है?

चिंतन एक मानव स्वभाव का सामान्य प्रक्रिया है। इसमें मानव का मस्तिष्क हमेशा गतिशील रहता है। चिंतन की प्रक्रिया तब आरंभ होती है जब मानव समस्या से घिरा होता है तथा समस्या के समाधान के लिए उपायों के बारे में सोचता है।

चिंतन के प्रकार:-

चिंतन के अनेकों प्रकार हो सकते हैं। चिंतन के प्रकार व्यक्ति के मानसिक संरचना पर निर्भर करता है।

  • चिंतन के प्रकार निम्न है-
  • अभिसारी चिंतन
  • अपसारी चिंतन
  • सृजनात्मक चिंतन
  • अमूर्त चिंतन
  • मूर्त चिंतन इत्यादि

आज हम लोग जानेंगे कि अभिसारी चिंतन क्या है? तथा अपसारी चिंतन क्या है?

अभिसारी चिंतन (Convergent Thinking) क्या है?

अभिसारी चिंतन एक बिंदु पर केंद्रित होता है। इस प्रकार के चिंतन में कल्पना करने की आवश्यकता नहीं होती है।यह  बुद्धि को बढ़ावा नहीं देती है। अभिसारी चिंतन पर तथ्यों आधारित होती है। अभिसारी चिंतन से किसी समस्या के हल निकालने पर केवल और केवल एक निकलता है। जब कोई बालक पहले से बने नियम और तथ्यों के आधार पर किसी समस्या का हल निकालता है तो उसके द्वारा किया गया चिंतन अभिसारी चिंतन (Convergent Thinking) कहलाता है।

अपसारी चिंतन (Divergent Thinking) क्या है?

अपसारी चिंतन को सृजनात्मक चिंतन भी कहा जाता है। अपसारी चिंतन या सृजनात्मक चिंतन खोज, अविष्कार तथा मौलिकता को जन्म देती है।
जब किसी व्यक्ति के सामने कोई समस्या रखी जाती है तो वह व्यक्ति उस समस्या के समाधान के लिए अपने कल्पना शक्ति का प्रयोग करता है तथा उस समस्या का एक से अधिक हल प्रस्तुत करता है। इस प्रकार के चिंतन को अपसारी चिंतन या सृजनात्मक चिंतन (Divergent Thinking) करते हैं।
अपसारी चिंतन out-of-the-box चिंतन पर आधारित है out-of-the-box चिंतन का मतलब होता है कि सामान्य सोच से अलग सोच पैदा कर किसी चीज के बारे में सूचना।

एक उदाहरण की सहायता से अभिसारी चिंतन तथा अभिसारी चिंतन को समझते हैं –

जब एक शिक्षक बालक से यह प्रश्न पूछता है कि 2 और 2 को जोड़ेंगे (2 + 2 = ?) तो कितना प्राप्त होगा? तो इस प्रश्न का उत्तर बालक अभिसारी चिंतन के द्वारा देगा क्योंकि इस प्रश्न का उत्तर निश्चित है इसका उत्तर हमेशा 4 होगा। वही शिक्षक इस प्रकार का प्रश्न पूछता है कि कौन-कौन से संख्या को जोड़ेंगे तो 4 प्राप्त होगा तो इस प्रश्न का उत्तर सभी बच्चे अलग अलग ढंग से देंगे।
जैसे- 1 + 3 = 4
      2 + 2 = 4
      4 + 0 =4
इस प्रश्न को हल करने के लिए बालक को कुछ अलग सोचना पड़ा। उसके कल्पना शक्ति पर बल पड़ा। बालक अपनी बुद्धि का इस्तेमाल किया। इस प्रकार का प्रश्न अपसारी चिंतन का उदाहरण है।

RKRSTUDY CTET Whatsaap group :- join now

अभिसारी चिंतन तथा अपसारी चिंतन में अंतर :- Click Here