आज के इस लेख में आप अनुकूलन आत्मसातीकरण एवं समायोजन के बारे में अध्ययन करेंगे। आप जानेंगे कि  अनुकूलन क्या है, आत्मसातीकरण क्या है एवं समायोजन क्या है? तो चलिए हमलोग बारी-बारी अनुकूलन आत्मसातीकरण एवं समायोजन के बारे में जानने का प्रयास करते हैं।

अनुकूलन,आत्मसातीकरण एवं समायोजन

अनुकूलन आत्मसातीकरण एवं समायोजन इन तीनों के बारे में पियाजे ने अपने संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत में वर्णन किया है।

जीन पियाजे स्विट्जरलैंड के एक मनोवैज्ञानिक थे। उन्होंने खोज किया कि बालकों में बुद्धि का विकास किस प्रकार से होता है। इस खोज को करने के लिए स्वयं अपने ही बच्चे को अपनी खोज का विषय बनाया। बच्चे जैसे-जैसे बड़े होते गए उनके मानसिक विकास संबंधी क्रियाओं का वे बड़ी बारीकी से अध्ययन करते रहें। इस अध्ययन के परिणाम स्वरूप उन्होंने जिस विचारों का प्रतिपादन किया, उन्हें जीन पियाजे के मानसिक या संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के नाम से जाना जाता है।

चलिए हमलोग बारी-बारी अनुकूलन आत्मसातीकरण एवं समायोजन के बारे में जानने का प्रयास करते हैं।

अनुकूलन,आत्मसातीकरण एवं समायोजन

⇒ अनुकूलन किसे कहते हैं?

वातावरण के अनुसार स्वयं को डालना अनुकूलन कहलाता है।

आत्मसातीकरण किसे कहते हैं?

पुराने ज्ञान के साथ नवीन ज्ञान को जोड़ने की प्रक्रिया को आत्मसातीकरण(Assimilation) कहते हैं।

⇒ समायोजन किसे कहते हैं?

जब बालक अपने पुराने स्कीमा ज्ञान में परिवर्तन करना आरंभ कर देता है तो वह प्रक्रिया समायोजन का लाती है।

आज के इस लेख में आप अनुकूलन,आत्मसातीकरण के बारे में अध्ययन किया । आपने जाना कि अनुकूलन क्या है, आत्मसातीकरण क्या है एवं समायोजन क्या है?

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