बाल-केंद्रित शिक्षा क्या है, तथा बाल-केंद्रित शिक्षा के विशेषताएं तथा सिद्धांत कौन से हैं?

बालकेंद्रित-शिक्षा की विशेषताएँ

बाल केंद्रित शिक्षा का अर्थ शिक्षण की संपूर्ण कार्य योजना बालक के चारो ओर रहनी चाहिए ।अर्थात कोई भी निर्णय शिक्षा से संबंधित लिया जाता है तो वह बालक को केंद्र मानकर किया जाना चाहिए। अतः बाल केंद्रित शिक्षा की मुख्य विशेषताएँ निम्न प्रकार से हैं :-         बाल-केंद्रित शिक्षा क्या है for ctet

बाल केंद्रित शिक्षा आधुनिक शिक्षा प्रणाली का अभिन्न अंग है। मनोवैज्ञानिकों ने इस संदर्भ में आने की विशेषताएं बताए हैं जो निम्न प्रकार है :-

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1. बालकों को समझना:-

बालकों के संबंध में शिक्षक को उनके व्यवहार के मूल आधार, आवश्यकताएं, मानसिक level, योग्यता, रुचि, व्यक्तित्व इत्यादि का विस्तृत ज्ञान होना चाहिए। क्योंकि शिक्षा का उद्देश्य बालकों की व्यवहार में परिमार्जित करना है।

2. पाठ्यक्रम :-

विधालय में किसी भी कक्षा का क्याक्रम वैयकितक भिन्नताओं , प्रेरणाओं, मूल्यो व सीखने के सिद्धांतो के मनोविज्ञान के ज्ञान के आधार पर बनाया जाना चाहिए । पाठ्मक्रम को बनाते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि विधार्थी व समाज की क्या आवश्यकताएँ होती है, और कौन–कौन सी पद्धतियो के द्वारा इन्हे आसानी से सीखा जा सकता है ।

3. बाल केंद्रित शिक्षा के अंतर्गत हस्तपरक गतिविधियों पर बल दिया जाता है।
बाल-केंद्रित शिक्षण के सिद्धांत:-
1. प्रेरणा का सिद्धांत

बालकों को प्रेरित करने के लिए उन्हें महापुरुषों की जीवन गाथा, नाटक, वैज्ञानिकों का योगदान इत्यादि के बारे में बताते हुए प्रेरित करना चाहिए।
कहानी एवं कविता के माध्यम से भी बालकों को प्रेरित करना चाहिए।

2.व्यक्तिगत अभिरुचि का सिद्धांत 

बालकों को यदि उनकी रूचि के अनुसार शिक्षण मिलेगा तो वह पढ़ने में के प्रति अधिक जागरूक एवं उत्सुक होंगे। बालको अभिरुचि को ध्यान में रखकर ही शिक्षण कार्य करना चाहिए।

3. लोकतांत्रिक सिद्धांत

शिक्षक को सभी छात्रों को एक समान दृष्टिकोण से देखना चाहिए ना कि भेदभाव पूर्ण तरीके से, प्रश्न पूछने का उत्तर देने के संदर्भ में शिक्षा को बदलाव नहीं करना चाहिए।

4. सर्वांगीण विकास का सिद्धांत

बालकों में उसके सभी पक्षों को सामाजिक,सांस्कृतिक, चारित्रिक, खेल, नेतृत्व विकसित करने पर बल देना चाहिए इसके माध्यम से बच्चों का सर्वांगीण विकास हो पाएगा।

5. चयन का सिद्धांत
  • बालकों को योग्यताओं के अनुरूप ही विषय वस्तु का चयन करना चाहिए।
  • बालकों को मानसिक दशा का भी शिक्षण के दौरान ध्यान रखना चाहिए।
  • बाल केंद्रित शिक्षा के अंतर्गत पाठ्यक्रम वातावरण के अनुसार लचीला, ज्ञान पर केंद्रीय , रुचि पर आधारित, राष्ट्रीय भावनाओं को विकसित करने वाला, बालकों के मानसिक स्तर के अनुरूप, इत्यादि विभिन्न नेताओं को ध्यान में रखकर बनाना चाहिए।
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