बाल्यावस्था किसे कहते हैं? पूर्व बाल्यावस्था एवं उत्तर बाल्यावस्था

बाल्यावस्था किसे कहते हैं?

बाल्यावस्था बालक के विकास के क्रम में आने वाला एक अवस्था होता है। यह अवस्था शैशवावस्था के बाद तुरंत आ जाती है। बाल्यावस्था 6 से 12 वर्ष तक की अवस्था होती है।

बाल्यावस्था किसे कहते हैं?
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विभिन्न मनोवैज्ञानिकों ने बाल्यावस्था की उम्र को अलग-अलग बताया है। किसी ने 2 से 12 वर्ष तक की अवस्था को बाल्यावस्था बताया है तो किसी ने 2 से 11 वर्ष तक की आयु को बाल्यावस्था के रूप में बताया है तो कई मनोवैज्ञानिकों ने बाल्यावस्था को 5 से 11 वर्ष के बीच की आयु को बताया है। अतः सभी मनोवैज्ञानिकों का अपना अपना मत है।

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सभी मनोवैज्ञानिकों के निष्कर्ष के अनुसार हम लोग कह सकते हैं कि 6 से 12 वर्ष के बीच की उम्र को बाल्यावस्था कहते हैं।

आज हम लोग बाल्यावस्था में होने वाले बालकों में परिवर्तन तथा उसके विकास की गति के बारे में अध्ययन करेंगे तो था साथ ही साथ यह भी जानेंगे कि इस अवस्था में बालकों का मनोवृति किस प्रकार का होता है।

बाल्यावस्था की परिभाषा

किलपैट्रिक के अनुसार :- “बाल्यावस्था जीवन का निर्माण काल है।”

रॉस के अनुसार :- “बाल्यावस्था मिथ्या परिपक्वता का काल है।”

कोले के अनुसार :- “बाल्यावस्था जीवन का अनोखा काल है।”

ब्लेयर जॉन्स एवं सिंपसन के अनुसार :- “बाल्यावस्था वह समय है,जब व्यक्ति के आधारभूत दृष्टिकोण व मूल्यों और आदर्शों का बहुत सीमा तक निर्माण होता है।”

बाल्यावस्था किसे कहते हैं?

बाल्यावस्था को दो भागों में बांटा गया है-

  1. पूर्व बाल्यावस्था 
  2. उत्तर बाल्यावस्था

पूर्व बाल्यावस्था क्या होता है?

  • संपूर्ण बाल्यावस्था के पहले आधे वर्ष को पूर्व बाल्यावस्था में रखा गया है।
  • पूर्व बाल्यावस्था 6 से 9 वर्ष तक के बीच की आयु को कहते हैं।

उत्तर बाल्यावस्था क्या है?

  • उत्तर बाल्यावस्था 9 से 12 वर्ष के बीच की अवस्था होती है।

बाल्यावस्था की विशेषताएं

  • बाल्यावस्था को बालक के शिक्षा प्रारंभ करने की उत्तम अवस्था मानी जाती है।
  • इस अवस्था में बालक के मानसिक योग्यताएं विकसित होने लगती है। बालक समझने, तर्क करने, चिंतन करने तथा कल्पना करने जैसी योग्यताएं विकसित हो जाती है।
  • बाल्यावस्था में बालको का समाजीकरण की प्रक्रिया भी प्रारंभ हो जाती है।
  • इस अवस्था में बालक क्या, कौन, क्यों जैसे प्रश्नों पर विचार करने लगता है।
  • इस अवस्था में बालक अपना देने का कार्य स्वयं करने लगता है। वाह शैशवावस्था की तरह दूसरे पर आश्रित नहीं रहता है।
  • बाल्यावस्था में बालक काल्पनिक जगत से निकल कर वास्तविकता जगत में विचरण करने लगता है।बाल्यावस्था किसे कहते हैं?
  • इस अवस्था में बालक रचनात्मक के कार्यों में रुचि लेने लगता है जैसे :- मिट्टी के बर्तन बनाना, चित्र बनाना, गुड़िया बनाना, रंगीन कपड़े या कागज से फूल बनाना इत्यादि।
  • बाल्यावस्था में बालक के संवेग में स्थिरता आ जाती है। बालक भय और क्रोध को नियंत्रित करना सीख जाता है।
  • इस अवस्था में बालक को में सामाजिक गुणों का विकास होने लगता है जैसे :- सहयोग, सद्भावना, सहनशीलता, आज्ञाकारीता इत्यादि।
  • बाल्यावस्था में बालकों का बहिर्मुखी विकास होने लगता है। बालक बाहर घूमना, वस्तुओं को देखना,दूसरे के प्रति जानकारी प्राप्त करना इत्यादि में रुचि लेने लगता है।

बाल्यावस्था को प्राकृतिक विकास की अवस्था कहा गया है।

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