ह्यूरिस्टिक विधि क्या है? Heuristic Method

इस लेख में हमलोग ह्यूरिस्टिक विधि के बारे में जानेंगे। हम लोग जानेंगे कि ह्यूरिस्टिक विधि क्या है? ह्यूरिस्टिक विधि का खोज किसने किया, ह्यूरिस्टिक विधि के गुण क्या है तथा ह्यूरिस्टिक विधि के दोष क्या है? तो चलिए हम लोग जानते हैं कि ह्यूरिस्टिक विधि किसे कहते हैं।

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ह्यूरिस्टिक विधि क्या है?

(Heuristic Method) ह्यूरिस्टिक विधि एक शिक्षण विधि है। ह्यूरिस्टिक (Heuristic) शब्द यूनानी भाषा के Heurisco से बना है जिसका तात्पर्य है ” मैं स्वयं खोज करता हूं ” इस प्रकार स्पष्ट है कि ह्यूरिस्टिक विधि स्वयं खोज करके या अपने आप सीखने की विधि है।

ह्यूरिस्टिक विधि को अन्वेषण विधि भी कहते हैं।

इस विधि में अध्यापक किसी विषय वस्तु की व्याख्या सीधे ढंग से नहीं करते हैं बल्कि प्रश्नों के द्वारा छात्रों को स्वयं खोजने हेतु बाध्य करता है। ह्यूरिस्टिक विधि में छात्र हमेशा सक्रिय रहते हैं तथा वह नई खोज करने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं।

इस विधि में छात्र स्वयं करके नए तथ्य एवं गुणों को सीखते हैं। ह्यूरिस्टिक विधि में छात्रों को स्वयं सोचने का अवसर प्रदान किया जाता है।

बर्नार्ड के अनुसार ह्यूरिस्टिक विधि

जहां तक संभव होता है वहां तक यह प्रणाली छात्र को खोजने वाले की स्थिति में रखती है। उसे अपनी आधार सामग्री स्वयं खोज नहीं पड़ती है और अपने प्रश्नों को स्वयं पूछना पड़ता है।इसके पश्चात आगमन की वैज्ञानिक विधि का प्रयोग करके उसे अपने सिद्धांतों का परीक्षण और अपने निष्कर्षों का निर्माण करना पड़ता है।

ह्यूरिस्टिक विधि गणित शिक्षण में सर्वाधिक उपयोगी सिद्ध होता है।

ह्यूरिस्टिक विधि के गुण

  • गणितीय शिक्षण में यह विधि काफी उपयोगी साबित होता है क्योंकि यह छात्रों में मनोवैज्ञानिक भावना और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का निर्माण करती है।
  • यह विधि तर्क, निर्णय, कल्पना, चिंतन आदि का उपयुक्त अवसर प्रदान करता है जिससे बालक के मानसिक विकास की प्रक्रिया में तीव्रता बनी रहती है।
  • ह्यूरिस्टिक विधि छात्र को ज्ञान की खोज करने की स्थिति में रखती है।
  • यह विधि छात्रों को स्वयं गणित कार्य करने हेतु प्रेरित करती है और उसमें स्वतंत्र अध्ययन और स्वाध्याय की आदत का निर्माण करती है।
  • ह्यूरिस्टिक विधि करके सीखने पर आधारित विधि है।

ह्यूरिस्टिक विधि के दोष

  • यह विधि केवल और साधारण बुद्धि वाले छात्रों के गणित शिक्षण के लिए उपयोगी है,क्योंकि प्रतिभाशाली बालक ही गणित के क्षेत्र में अन्वेषण करने में समर्थ होते हैं,साधारण बुद्धि वाले छात्र स्वयं अन्वेषण नहीं कर पाते हैं।
  • गणित शिक्षण की यह विधि छात्रों को गलत नियम, निष्कर्ष अथवा सिद्धांतों पर पहुंचा सकती है,क्योंकि उनका मस्तिष्क इतना परिपक्व और विकसित नहीं होता है कि वे अपनी गलती को समझ सके।
  • निम्न कक्षाओं में गणित शिक्षण में इस विधि का उपयोग नहीं किया जा सकता है क्योंकि निम्न कक्षाओं के छात्र स्वयं अन्वेषण करने में असमर्थ होते हैं।
  • इस विधि में आगमन और वस्तु पूरक शिक्षण के अतिरिक्त अन्य किसी प्रकार के शिक्षण का प्रयोग नहीं किया जा सकता। इसका परिणाम यह होता है कि इसमें शिक्षण के समस्त पहलुओं का समावेश नहीं हो पाता है। यह भी इस विधि का दोष है।
  • चुकिं यह विधि स्वयं करके सीखने पर आधारित विधि है इसीलिए इस विधि से शिक्षण कार्य में अधिक समय लगता है।

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