महात्मा गांधी के शिक्षा दर्शन FOR CTET D.El.Ed & B.Ed

आज के इस लेख में हम लोग जानेंगे कि महात्मा गांधी के शिक्षा दर्शन क्या है, गांधी जी ने शिक्षा के संदर्भ में अपना क्या विचार प्रस्तुत किए साथ ही साथ हम लोग भी जानेंगे कि बालकों को किस प्रकार की शिक्षा देनी चाहिए तथा महात्मा गांधी के शिक्षा उद्देश्य के बारे में भी अध्ययन करेंगे।

महात्मा गांधी के शिक्षा दर्शन

महात्मा गांधी के शिक्षा दर्शन उनके जीवन दर्शन पर आधारित है। गांधी जी की सत्य, अहिंसा,त्याग निष्ठा एवं सहानुभूति आदि मानवीय गुणों में श्रद्धा थी। महात्मा गांधी के जीवन में सामाजिक, राजनैतिक,आर्थिक एवं अध्यात्मिक सभी पक्षों को स्थान प्राप्त हुआ। इसका कारण यह था कि गांधीजी शिक्षक उपयोगी समझते थे।

डॉक्टर एम एस पटेल के अनुसार, महात्मा गांधी ने उन महान शिक्षकों एवं उपदेशकों की मंडली में अनोखा स्थान प्राप्त किया है, जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में नवीन ज्योति प्रदान की है।

गांधीजी के अनुसार शिक्षा का अर्थ

महात्मा गांधी के अनुसार,-साक्षरता ना तो शिक्षा का अंत है और न प्रारंभ, साक्षरता केवल एक साधन है, जिसके माध्यम से पुरुष और स्त्री को शिक्षित किया जा सकता है।

महात्मा गांधी के शिक्षा दर्शन

गांधीजी के अनुसार, ‘शिक्षा से मेरा आशय बालक और मनुष्य के शरीर, मस्तिष्क और आत्मा में पाए जाने वाले सर्वोत्तम गुणों का चहुमुखी विकास है।

गांधीजी के अनुसार- “साक्षरता ही मनुष्य का असली आभूषण है”

महात्मा गांधी जी का शिक्षा के उद्देश्य

स्वावलंबी बनाने हेतु शिक्षा देना

गांधीजी चाहते थे कि शिक्षाएं ऐसी हो जो बालक को आगामी जीवन में आत्मनिर्भर बना सके।उसमें प्रत्येक कार्य स्वयं करने की क्षमता उत्पन्न कर सके। व जीवन को विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए स्वाबलंबी बना सके।

संस्कृति उद्देश्य

महात्मा गांधी जी शिक्षा के क्षेत्र में भी सभी देशों की अच्छी बातें और संस्कृति को अपना लेने के पक्ष में थे। गांधीजी ने शिक्षा के साहित्यिक पक्ष की अपेक्षा सांस्कृतिक पक्ष को अधिक महत्व दिया था।शिक्षा में सांस्कृतिक उद्देश्य से ही मानवता की भावना का विकास होता है ऐसा गांधी जी का मानना था।

महात्मा गांधी के शिक्षा दर्शन

चरित्र निर्माण

गांधीजी के नैतिकता को धर्म से उत्तम माना तथा सच्चे धर्म और सच्ची नैतिकता में अभिन्न संबंध बतलाया। उन्होंने समझाया कि नैतिकता का मूर्त रूप ही चरित्र है जिसका निर्माण करना शिक्षा का सर्वोपरि उद्देश्य है।

शारीरिक विकास

स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का होना संभव है और वहीं स्वास्थ्य विचारों का स्रोत है। गांधी जी का विश्वास था कि शारीरिक श्रम द्वारा बौद्धिक, शारीरिक और आध्यात्मिक तीनों का विकास सफलता से हो जाता है।

शिक्षा का सर्वोच्च उद्देश्य

महात्मा गांधी के अनुसार, शिक्षा का सर्वोच्च उद्देश्य परम सत्य अथवा ईश्वर से साक्षात्कार करना है। सत्य की खोज एवं आत्मा का ज्ञान आवश्यक है,जिससे बच्चों में नैतिक गुणों का प्रादुर्भाव कर चारित्रिक विकास किया जा सके।

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