इस लेख में हमलोग CTET Syllabus के Pedagogy के अंतर्गत आने वाले Topic “निदानात्मक शिक्षण (Diagnostic Teaching)” के बारे में अध्ययन करेंगे। इस पोस्ट में हम लोग जानेंगे कि निदानात्मक शिक्षण क्या है? निदानात्मक शिक्षण की परिभाषा क्या है? हम लोग यह भी जानेंगे कि निदानात्मक शिक्षण के चरण कौन-कौन से होते हैं? तो चलिए हम लोग जानते हैं कि निदानात्मक शिक्षण किसे कहते हैं?

निदानात्मक शिक्षण क्या है?

निदानात्मक शिक्षण को एक उदाहरण की सहायता से समझते हैं-
आपको कभी कोई शरीर की बीमारी हुई होगी। तो आप डॉक्टर के पास गए होंगे। अपने डॉक्टर को अपनी सारी समस्याएं को बताया होगा। समस्याओं को सुनने के पश्चात डॉक्टर ने उस समस्या के निदान करने के लिए कुछ दवाइयां दिए होंगे। उस दवाइयों के सेवन से आप की बीमारी धीरे-धीरे खत्म हो गई होगी। यह भी एक निदान की प्रक्रिया है लेकिन यहां बीमारियों का निदान हुआ है।
हम लोग अब शैक्षणिक त्रुटि के निदान के बारे में जानते हैं।

निदानात्मक शिक्षण किसे कहते हैं?

कोई छात्र किसी विषय के अध्ययन करते समय कहां गलतियां करता है? किस प्रकार की गलती करता है? तथा वह गलती क्यों करता है? इसकी जानकारी प्राप्त करना तथा इसको दूर करना ही निदानात्मक शिक्षण (Diagnostic Teaching) कहलाता है।

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निदानात्मक शिक्षण की परिभाषा

मरसेल के अनुसार:- जिस शिक्षण में बालकों की विशिष्ट त्रुटियों का निदान करने का विशेष प्रयास किया जाता है उसे शैक्षिक निदान कहते हैं।

गुड के अनुसार- निदान का अर्थ है अधिगम संबंधी कठिनाइयों और कमियों के स्वरूप का निर्धारण करना।

योकम व सिम्पसन के अनुसार- निदान किसी कठिनाई का उसके चिन्हों या लक्षणों से ज्ञान प्राप्त करने की कला या कार्य है। यह तथ्यों एवं परीक्षण पर आधारित कठिनाई का स्पष्टीकरण है।

निदानात्मक शिक्षण के चरण

बालक के अधिगम कठिनाई का निदान एक चरण में होता है। एक शिक्षक के द्वारा निदानात्मक शिक्षण प्रक्रिया के चरण निम्नलिखित है:-

  • सर्वप्रथम समस्याग्रस्त बालक की पहचान की जाती है।
  • इसके बाद यह जानने का प्रयास किया जाता है की त्रुटियां कहां है? अर्थात बालक के गलती करने का क्षेत्र कौन सा है?
  • इसके पश्चात कठिनाई की प्रकृति को पता लगाया जाता है।
  • कठिनाई के प्रकृति जानने के बाद यह पता लगाया जाता है कि त्रुटियों के क्या कारण है?
  • त्रुटियों के पता लगाने के बाद शिक्षक इस बात पर विचार करते हैं कि इसका निदान कैसे किया जाए।
  • समस्या के उपचार होने के पश्चात शिक्षक हमेशा ध्यान देते हैं कि यह समस्या पुनः उत्पन्न नहीं हो।

उपरोक्त लेख में हम लोगों ने जाना कि निदानात्मक शिक्षण क्या है? निदानात्मक शिक्षण की परिभाषा क्या है?साथ में हम लोगों ने यह भी जाना कि निदानात्मक शिक्षण के चरण कौन-कौन से हैं?

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