पर्यावरण शिक्षण क्या है? Paryavaran Sikshan Kise kahte Hain?

पर्यावरण शिक्षण क्या है? Paryavaran Sikshan Kise kahte Hain? पर्यावरण शिक्षण का महत्व क्या है तथा पर्यावरण शिक्षण के उद्देश्य क्या है?

पर्यावरण शिक्षण का अर्थ

कक्षा 3 से 5 तक की N.C.E.R.T की हिंदी में पर्यावरण अध्ययन की पुस्तकों का शीर्षक “आस-पास” है और अंग्रेजी में “Looking around” है।

पर्यावरण शिक्षण क्या है?

पर्यावरण अध्ययन का अंग्रेजी में संक्षिप्त रूप EVS है जिसका विस्तृत रूप एनवायरमेंटल स्टडीज (Environmental studies) है।

पर्यावरण शिक्षण की परिभाषा

हमारे चारों तरफ की हुए वस्तुएं जिनसे हम घिरे हुए होते हैं, जो हमारे दैनिक जीवन को किसी न किसी रूप से प्रभावित करते हैं, उन्हें पर्यावरण कहते हैं तथा उस पर्यावरण के बारे में विस्तृत अध्ययन करना ही पर्यावरण शिक्षण कहलाता है।

पर्यावरण शिक्षण का महत्व

हमारे पर्यावरण में सभी चीजें उपस्थित है और वह सभी चीजें सभी सजीवों के लिए है और इन सभी चीजों को बचाए रखने के लिए पर्यावरण शिक्षण अति आवश्यक है।

पर्यावरण शिक्षण के महत्व निम्नलिखित है :-

पर्यावरण शिक्षण के अंतर्गत हम लोग पर्यावरण की समस्याओं एवं उनके निदान तथा पर्यावरण का संरक्षण करना सीखते हैं।

  • पर्यावरण शिक्षण के द्वारा हम पर्यावरण को संतुलित रख सकते हैं।
  • पर्यावरण शिक्षा में मनुष्य की चेतना को बढ़ाती है।
  • पर्यावरण शिक्षण हमें पर्यावरण और मनुष्य की क्रियाओं के बीच के संबंध को दर्शाता है।
  • पर्यावरण शिक्षण से हमें यह ज्ञात होता है कि पर्यावरण के घटक हमारे लिए क्यों आवश्यक होते हैं।
  • पर्यावरण शिक्षण से हमें प्रदूषण तथा उससे होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी मिलती है।
  • पर्यावरण शिक्षण के फल स्वरुप हम लोग पर्यावरण का संरक्षण कर सकते हैं।
  • पर्यावरण में उपस्थिति चीज जो हमारे लिए काफी आवश्यक होते हैं उसका उपयोग कैसे करें तथा कम से कम दुरुपयोग हो यह हमें पर्यावरण शिक्षण के द्वारा सीखने को मिलता है।

पर्यावरण शिक्षण क्या है?

पर्यावरण शिक्षण के उद्देश्य

जब हम लोग पर्यावरण शिक्षा प्रदान करते हैं तो हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि उसमें पर्यावरण के महत्व निहित हो अन्यथा वह शिक्षा व्यर्थ है।

पियाजे के कथन के अनुसार :- बच्चे दुनिया के बारे में अपने समाज का सृजन करते हैं को मध्य नजर रखते हुए पर्यावरण शिक्षण का निम्न उद्देश्य होना चाहिए।

  • पर्यावरण के प्रति विद्यार्थियों में जिज्ञासा, रुचि, कल्पना एवं स्मरण शक्ति का विकास करना।
  • आसपास के पर्यावरण से विद्यार्थियों को भलीभांति परिचित कराना।
  • विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण का विकास करना।
  • प्रकृति की विभिन्नता एवं इसके कारणों को विद्यार्थियों को बताना।
  • पर्यावरण हमारा धरोहर है और हम उसके पालक हैं इस बातों का विद्यार्थियों को ज्ञान देना चाहिए।
  • विद्यार्थियों में भौतिक परिवेश तथा सामाजिक परिवेश के प्रति संवेदनशील तथा जागरूकता का विकास करना।
  • मनुष्य के जीवन पर पड़ने वाले पर्यावरण के विभिन्न प्रभावों को बताना।
  • पर्यावरण प्रदूषण एवं पर्यावरण के संरक्षण के विषय में संपूर्ण जानकारी देना।
  • विद्यार्थियों में वास्तविक जीवन की चिंताओं के विषय में समझ उत्पन्न करना।
  • विद्यार्थियों में अच्छे नागरिक के गुण का विकास करना भी पर्यावरण शिक्षण का एक उद्देश्य है।
  • सार्थक अधिगम के लिए कक्षा – कक्ष की गतिविधियों को विद्यालय के बाहर के परिवेश से जोड़ना।
  • उपरोक्त सारी बातें पर्यावरण शिक्षण के प्रमुख उद्देश्य हैं।

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