प्रयास एवं त्रुटि का सिद्धांत। थार्नडाइक का प्रयास एवं त्रुटि का सिद्धांत। प्रयत्न एवं भूल का सिद्धांत क्या है?

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प्रयास एवं त्रुटि का सिद्धांत एक अधिगम सिद्धांत है। प्रयास एवं भूल का सिद्धांत के प्रतिपादन एडवर्ड ली थार्नडाइक ने किया था। हम लोग आज के इस लेख में थार्नडाइक का प्रयास एवं त्रुटि के सिद्धांत को जानेंगे।

थार्नडाइक का सिद्धांत

थार्नडाइक ने अधिगम का एक सिद्धांत दिया है जिसे कई नामों से जाना जाता है जो निम्नलिखित है:-

  • S.S. Theory
  • प्रयास एवं त्रुटि का सिद्धांत
  • उद्दीपन अनुक्रिया का सिद्धांत
  • आवृत्ति का सिद्धांत
  • संबंध वाद का सिद्धांत
  • अधिगम का बंध सिद्धांत
  • प्रयत्न एवं भूल का सिद्धांत
  • प्रयत्न एवं त्रुटि का सिद्धांत

उपरोक्त सभी सिद्धांत, थार्नडाइक का सीखने का सिद्धांत है।

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थार्नडाइक का बिल्ली पर प्रयोग

एडवर्ड ली थार्नडाइक महोदय ने अपने प्रयोग के लिए एक भूखी बिल्ली को चुना। उन्होंने एक पिंजरा लिया जिसमें दरवाजा लगा था जो लीवर के दबाने पर वह दरवाजा खुलता था। पिंजरे इस प्रकार का था जिससे पिंजरे से बाहर रखी वस्तु को आसानी से देखा जा सकता था। उन्होंने उस भूखी बिल्ली को पिंजरे में बंद कर दिया तथा पिंजरे के बाहर एक मरी हुई मछली को रख दिया। चुॅकि बिल्ली भूखी थी इसीलिए वह मछली को खाने के लिए उछल कूद करने लगी। इसी उछल कूद के दौरान बिल्ली का पैर लीवर पर पड़ जाता है जिससे दरवाजा खुल जाता है तथा बिल्ली बाहर जाकर उस मछली को खाने में सफल हो जाती है।प्रयास एवं त्रुटि का सिद्धांत
थार्नडाइक ने फिर से बिल्ली को पिंजरे में रखा तथा बाहर मछली रख दिया। बिल्ली फिर से उछल कूद करने लगी तथा इस बार पहले की अपेक्षा वा कम समय में दरवाजा खोलने में सफल रही। इस प्रकार से ठंडा एक नहीं कई बार बिल्ली को पिंजरे में डाला और यह प्रक्रिया काफी देर तक चलती रही। काफी देर बाद एक समय ऐसा आया कि बिल्ली को यह ज्ञात हो गया कि इस लीवर को दबने से दरवाजा खुल जाती है अब बिल्ली आसानी से दरवाजा खोलकर मछली खा लेती थी।

इसी प्रयोग पर उन्होंने प्रयास एवं त्रुटि का सिद्धांत दिया।

प्रयास एवं त्रुटि के सिद्धांत की विशेषता एवं गुण

  • इस सिद्धांत पर बालक चलना, बोलना तथा भोजन करना सीखना है।
  • यह सिद्धांत करके सीखने पर बल देता है।
  • इसी सिद्धांत के अनुसार थार्नडाइक ने बताया कि पशु एवं मनुष्य दोनों में सामान्य ढंग से सीखने की प्रक्रिया होती है।
  • यह सिद्धांत बालक में धैर्य एवं परिश्रमी गुण का निर्माण करती है।
  • प्रयास एवं त्रुटि का सिद्धांत आशावादी दृष्टिकोण पैदा करती है।
  • इस सिद्धांत से यह निष्कर्ष निकलता है कि सीखने की प्रक्रिया क्रमागत चलती है।
  • यह सिद्धांत मंदबुद्धि बालक के अधिगम हेतु अधिक उपयोगी है।

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