प्रयोगशाला विधि क्या है? ‍What is Laboratory method?

प्रयोगशाला विधि क्या है? विज्ञान के सभी शाखाओं के अध्ययन में प्रयोगशाला विधि अत्यंत लाभदायक सिद्ध होती हैं। विज्ञान के साथ-साथ गणित जैसे विषयों में भी प्रयोगशाला विधि काफी लाभप्रद है।

गणित के अध्ययन को सुधारने एवं अर्थ पूर्ण बनाने के लिए विद्वानों ने प्रयोगशाला विधि को ही लाभप्रद माना है। गणित एक ऐसा विषय है जो केवल पढ़ कर ही नहीं सीखा जाता बल्कि करने से सीखा जाता है। अतः विज्ञान विषय के साथ-साथ गणित के विषय में भी प्रयोगशाला विधि काफी महत्वपूर्ण है।

प्रयोगशाला विधि क्या है?

प्रयोगशाला विधि शिक्षा की प्रसिद्ध उक्ति ‘स्थूल से सूक्ष्म की ओर’ पर आधारित विधि है। इस विधि में छात्र स्वयं प्रयोगशाला में उपस्थित यंत्रों, उपकरणों तथा अन्य सामग्री की सहायता से विषय वस्तु के तथ्यों, नियमों, सिद्धांतों, संबंध वादी की सत्यता की जांच करते हैं और उनका उपयोग समस्याओं के हल ज्ञात करने में करते हैं।

Laboratory method प्रयोगशाला विधि “ज्ञात से अज्ञात “ तथा “करो और सीखो” के सिद्धांत पर काम करता है।
यह विधि विद्यार्थियों को स्वयं अपने हाथों से काम करने की प्रेरणा देती है तथा उनमें सीखने के प्रति रुचि जागृत करती है।

प्रयोगशाला विधि के गुण

  • प्रयोगशाला में सीखा हुआ ज्ञान स्थाई होता है तथा प्रायोगिक उपयोग की संभावनाएं भी अधिक होती है।
  • यह विधि विद्यार्थियों को स्वयं अपने हाथों से काम करने की प्रेरणा देती है।
  • इस विधि से प्राप्त ज्ञान सक्रिय रहता है तथा स्कूल तथ्यों पर आधारित होता है।
  • इस विधि द्वारा छात्रों को प्रयोग करने की भावना को प्रोत्साहन मिलता है।
  • प्रयोगशाला विधि के द्वारा किसी विषय वस्तु के सिद्धांतों, संकल्पनाओं, संबंधों, वीडियो आदि का स्पष्ट ज्ञान प्राप्त होता है।
  • इस विधि से विद्यार्थियों में निरीक्षण एवं तर्क करने की क्षमता का विकास होता है।

प्रयोगशाला विधि के दोष

  • यह विधि सभी विषयों के लिए उपयुक्त नहीं होती है।
  • यह विधि काफी खर्चीली विधि है। गणित की एक अच्छी प्रयोगशाला संगठित करने के लिए पर्याप्त धन की तथा परिश्रम की आवश्यकता होती है। साधारण विद्यालय इसके लिए धन खर्च करने की क्षमता नहीं रखता।
  • प्रयोगशाला विधि सभी विद्यार्थियों के लिए समान रूप से उपयोगी नहीं है, क्योंकि प्रत्येक विद्यार्थी की कार्य क्षमता समान नहीं होती।
  • यह विधि काफी धीमी विधि है तथा निर्धारित पाठ्यक्रम को इसकी सहायता से समय पर पूरा नहीं किया जा सकता है।
  • प्रयोगशाला विधि में सभी अध्यापक बच्चों को नहीं शिक्षा दे सकते हैं इसीलिए प्रयोगशाला विधि में अलग से शिक्षा की आवश्यकता पड़ती है।

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