आज के इस लेख में हम लोग एक बहुत ही प्रचलित विधि के बारे में अध्ययन करेंगे वह विधि है:- साक्षात्कार जिसे अंग्रेजी में Interview इंटरव्यू भी कहा जाता है। इस लेख में आप जानेंगे कि साक्षात्कार क्या है? साक्षात्कार विधि क्या है? साक्षात्कार के प्रकार कौन-कौन से हैं तथा साक्षात्कार विधि का प्रयोग कैसे किया जाता है? तो चले सबसे पहले हम लोग जानते हैं कि साक्षात्कार किसे कहते हैं?

साक्षात्कार विधि क्या है? साक्षात्कार के प्रकार | साक्षात्कार क्या है? | Interview Kya hai

साक्षात्कार क्या है? Inerview Kya hai

साक्षात्कार शब्द से सामान्यता हम सभी लोग परिचित हैं। किसी कक्षा या विशेष अध्ययन कोर्स में प्रवेश लेने तथा किसी नौकरियों में चयन तथा पदोन्नति के लिए साक्षात्कार का सहारा लिया जाता है। जिसमें व्यक्तित्व, व्यवहार एवं  योगिताओं की जांच किया जाता है।

साक्षात्कार विधि क्या है?

साक्षात्कार विधि में विद्यार्थी के व्यवहार व व्यक्तित्व के गुणों के बारे में जानकारी एकत्रित करनी होती है। उसे आमने-सामने बैठाकर उससे उचित प्रश्न पूछे जाते हैं तथा उसके उत्तर देने के ढंग एवं उत्तर का विश्लेषण कर उसके व्यवहार एवं व्यक्तित्व के बारे में उचित निष्कर्ष निकाले जाते हैं। प्रश्न एवं उत्तर प्राप्त करने का तरीका मौखिक एवं लिखित दोनों हो सकते हैं अथवा दोनों मिला-जुला करके भी हो सकता है। प्रश्न पूछना एवं उत्तर प्राप्त करना धीरे-धीरे एक गंभीर वार्तालाप तथा विचार विनिमय का रूप धारण कर लेता है। जिसके आधार पर साक्षात्कार लेने वाले व्यवहार एवं व्यक्तित्व गुणों की उचित अंदाजा लेने में काफी सीमा तक सफल हो जाते हैं।

साक्षात्कार के प्रकार (Types of Interview)

रचना और आयोजन की दृष्टि से साक्षात्कार दो प्रकार का हो सकता है :- 

  1. संरचित एवं प्रमाणिक साक्षात्कार (Structured and Standardized) 

2. असंरचित एवं अप्रमाणिक साक्षात्कार (Unstructred and Non-Standerdized)

संरचित एवं प्रमाणिक साक्षात्कार

इस प्रकार के साक्षात्कार में व्यवहार एवं व्यक्तित्व संबंधी जिन बातों के बारे में जानकारी एकत्रित करनी हो उनसे संबंधित उचित एवं आवश्यक प्रश्न की रचना साक्षात्कार लेने से पहले ली जाती है। उन प्रश्नों का क्रम भी पहले से तैयार किया जाता है। किसी प्रश्न के लिए किस प्रकार के उत्तर अथवा अनुक्रिया द्वारा व्यवहार व व्यक्तित्व की किन विशेषताओं व गुणों का किस रूप में मूल्यांकन किया जाए जाएगा, उसका निर्धारण भी पहले से ही कर लिया जाता है। इस प्रकार के पूर्व निर्धारण से साक्षात्कार की प्रक्रिया काफी नियंत्रित एवं व्यवस्थित हो जाती है।

असंरचित एवं अप्रमाणिक साक्षात्कार

इस प्रकार के साक्षात्कार में विद्यार्थियों से पूछे जाने पर प्रश्न पहले से तैयार नहीं किए जाते हैं, और ना ही उनकी संख्या भी निश्चित की जाती है। साक्षात्कार लेने वाले व्यक्ति अपनी इच्छा अनुसार कोई भी प्रश्न पूछने को पूरा स्वतंत्र होता है। कई बार किसी एक विषय या विचार की बाल की खाल निकालने में भी साक्षात्कार का सारा समय बीत जाता है। इस तरह इस प्रकार के अध्ययन कार्य में भटकाव की आशंका बनी रहती है। इस प्रकार के साक्षात्कार की एक बहुत ही अच्छाई भी है जो यह है – कि स्वतंत्र अभिव्यक्ति के अवसर इस व्यवस्था में काफी मिलते हैं इसके फलस्वरूप बालक को अच्छी तरह जानने एवं समझने में इस प्रकार का साक्षात्कार काफी सहयोगी सिद्ध हो सकता है।

साक्षात्कार तकनीक का प्रयोग कैसे किया जाता है?

साक्षात्कार विधि के प्रयोग का कार्य मुख्यतः निम्न तीन चरणों में पूरा होता है

1. साक्षात्कार लेने से पहले की तैयारी (Prepration before the Interview)
2. साक्षात्कार लेना (Taking Interview)
3. साक्षात्कार का परिणाम निकालना (Drawing Conclusions from Interview)

साक्षात्कार लेने की पूर्व तैयारी के अंतर्गत निम्नलिखित चरण आते हैं

  • साक्षात्कार लेने वाला स्थान अधिक शोरगुल अधिक गर्मी सर्दी आदि से मुक्त हो तथा साक्षात्कार लेने देने वाला व्यक्ति अपने आपको आराम में अनुभव कर सके ऐसे प्रयत्न किए जाने चाहिए।
  • साक्षात्कार देने वाले व्यक्ति से आत्मीयता स्थापित करने का प्रयत्न किया जाना चाहिए।
  • प्रश्न किस प्रकार के पूछे जाते हैं यह साक्षात्कार के उद्देश्य पर निर्भर करता है अतः इसके बारे में थोड़ा बहुत विचार कर लेना चाहिए साक्षात्कार के दौरान भी आवश्यकता अनुसार इस में परिवर्तन किया जा सकता है।
  • आवश्यकता हो तो टेप रिकॉर्डर फिल्म चेक लिस्ट स्टेनोग्राफी आदि साधनों की सहायता लेने का प्रबंध कर लेना चाहिए।

2. साक्षात्कार लेना

  • बालक का विश्वास अर्जित कर उचित प्रश्नों की सहायता से सूचना एकत्रित करने का प्रयास करना चाहिए
  • उद्देश्य बालक के बारे में जाना ना तथा उसको सहायता पहुंचाना है अतः आलोचनात्मक दृष्टि को नहीं अपना चाहिए।
  • आवश्यक बातों को रिकॉर्ड करने का प्रयास करना चाहिए।
  • बालको अपने को अभिव्यक्त करने का पूरा मौका दिया जाना चाहिए।
  • उसकी भाव बोलने के ढंग तथा संवेगात्मक लक्षणों को भी नोट किया जाना चाहिए।
  • साक्षात्कार के बाद बालक को संतुष्टि का अनुभव कराने का प्रयत्न करना चाहिए।

साक्षात्कार के परिणाम निकालना

  • साक्षात्कार के समय नोट की हुई बातों का मूल्यांकन कर उचित निष्कर्ष निकालने का प्रयत्न किया जाना चाहिए।
  • आवश्यक हो तो दोबारा साक्षात्कार करने या किसी और साधन से आवश्यक जानकारी लेने और जांच पड़ताल करने का प्रयत्न किया जाना चाहिए।
  • बालक को उससे किए साक्षात्कार के परिणाम स्वरूप आवश्यक निर्देशन और परामर्श देने की व्यवस्था भी की जानी चाहिए।

आज के इस लेख में आपने जाना कि- साक्षात्कार विधि क्या है? साक्षात्कार के प्रकार क्या है? Interview Kya hai

मैं उम्मीद करता हूं कि यह लेख आपको पसंद आई होगी तथा यह आपके लिए उपयोगी भी होगा। इसी तरह के अन्य लेख को पढ़ने के लिए पढ़ते रहिए…..RKRSTUDY.NET

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