सामुदायिक गणित क्या है? Community Mathematics

सामुदायिक गणित क्या है?आज हम लोग गणित के महत्व के बारे में अध्ययन करेंगे।गणित का सामाजिक प्राणियों से किस प्रकार संबंध है इन शब्दों के बारे में विस्तृत रूप से अध्ययन करेंगे। हम लोग जानेंगे कि सामुदायिक गणित क्या है तथा यह किस प्रकार से मनुष्य के लिए लाभदायक है।

सामुदायिक गणित क्या है?

वह गणित जो समाज में मनुष्य अपने दैनिक जीवन के यापन में जिस गणित का उपयोग करता है वह सामुदायिक गणित कहलाता है।

सामुदायिक जीवन में गणित का महत्व

सामुदायिक गणित का संबंध सामाजिक जीवन से है। मनुष्य अपने जीवन यापन करने के लिए वस्तुओं को खरीदना है तथा बिक्री करता है। तुम वहां भी मनुष्य को जोड़ तथा घटाव की जरूरत पड़ती है। यानी कि हम कह सकते हैं कि वहां भी मनुष्य को गणित की आवश्यकता पड़ती है तो इस प्रकार के गणित को सामुदायिक गणित कहते हैं।

सामुदायिक गणित क्या है?

साधारण शब्दों में समझें तो समुदाय गणित का तात्पर्य किताबी ज्ञान और प्रश्नों के अलावा हमारे दैनिक जीवन में जहां कहीं भी गणित का उपयोग किया जाता है वह सारा गणित सामुदायिक गणित के अंतर्गत आता है।

उदाहरण :- एक व्यक्ति है जो अपने जीवन यापन करने के लिए किराना दुकान चलाता है। उसका दुकान सामाजिक परिवेश के अंतर्गत है। उस दुकान पर प्रतिदिन लोग अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए सामान खरीदते हैं। सामान खरीदने के बदले में रुपया का भुगतान करना पड़ता है। तो वहां पर दुकानदार पैसे को लेता है तथा ग्राहक पैसे देता है। कितने पैसे भूगतान करना है तथा दुकानदार को कितने पैसे वापस लेना है। इन सब बातों का ज्ञान गणित से प्राप्त होता है। और इस प्रकार का गणित सामाजिक जीवन यापन में मनुष्य उपयोग करते हैं तो इस प्रकार का गणित सामुदायिक गणित कहलाता है।

समाज और गणित का संबंध

समाज के प्रत्येक व्यक्ति को गणित की ज्ञान की आवश्यकता होती है। प्रत्येक व्यक्ति को अपना जीवन यापन करने के लिए गणित को जानना जरूरी है। समाज समाज में उपस्थित उच्च वर्गीय लोग, मध्यमवर्गीय लोग तथा निचले वर्ग के लोग सभी लोगों को गणित की आवश्यकता पड़ती है। इंजीनियर, उद्योगपति, बैंक कर्मी, डॉक्टर से लेकर छोटे छोटे व्यक्ति जैसे मजदूर, रिक्शा चालक, बढ़ई सभी लोगों को अपनी रोजी रोटी कमाने तथा अपने परिवार की देखभाल करने के लिए गणित की आवश्यकता पड़ती है।

इस प्रकार से संक्षिप्त रूप में यह कहा जा सकता है कि हमारे समाज में प्रत्येक व्यक्ति जो अपने जीविका कमाता है तथा आय – व्यय करता है उसे किसी न किसी रूप में गणित की ज्ञान होती है।

इस संबंध में यंग महोदय का कथन है कि – लौह, वाष्प और विद्युत के इस युग में जिस और भी मुड़ कर देखें गणित ही सर्वोपरि है। यदि रीड की हड्डी निकाल दी जाती तो हमारी बहुत से संस्कृति और सभ्यता का ही अंत हो जाएगा।

नैतिक मूल्य और गणित

नैतिकता एक महत्वपूर्ण प्रत्यय है जो समय, व्यक्ति, परिस्थिति तथा स्थान से सबसे अधिक प्रभावित है।गणित का ज्ञान बच्चों के चारित्रिक एवं नैतिक विकास में सहायक है।

एक अच्छा चरित्रवान व्यक्ति में जितने गुण होने चाहिए, इनमें से अधिकांश गुण गणित विषय के अध्ययन से विकसित होते हैं।

दार्शनिक डटन के अनुसार – गणित के तारीख का सम्मत विचार, यथार्थ कथन तथा सत्य बोलने की सामर्थ प्रदान करता है। व्यर्थ गप्पे, आडंबर, धोखा तथा छल कपट यह सब उस्मान का कहना है, जिसको गणित का प्रशिक्षण नहीं दिया क्या है।

सांस्कृतिक मूल्य और गणित

किसी क्षेत्रीय विशेष का सांस्कृतिक तथा उसकी सभ्यता गणित से अत्यधिक प्रभावित होती है। किसी क्षेत्रीय विशेष व्यक्तियों के रहन-सहन, वेशभूषा उसकी सभ्यता और संस्कृति गणित से प्रभावित होती है।

गणितज्ञ हागवेन के अनुसार गणित सभ्यता और संस्कृति का दर्पण है।

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