आज हम लोग जानेंगे की शिक्षा का अर्थ, परिभाषा, उद्देश्य क्या है ? शिक्षा के बारे में भारत के अलग-अलग विद्वानों ने क्या क्या आपने विचार को दिए। इन सभी के बारे में आज हम लोग अध्ययन करेंगे।

शिक्षा का आशय जीवन में चलने वाली ऐसी प्रक्रिया से है। जो मनुष्य को अनुभव द्वारा प्राप्त होते हैं तथा उसके पथ प्रदर्शक बनते हैं। यह प्रक्रिया सीखने के रूप में बचपन से चलती है और जीवनपर्यंत में चलती रहती है। जिसके फल स्वरूप मनुष्य अनुभव भंडार में निरंतर वृद्धि होती रहती हैं।

शिक्षा का शाब्दिक अर्थ :-

शिक्षा शब्द का संस्कृत भाषा का मूल रूप है जिसका शाब्दिक अर्थ है-विद्या प्राप्त करना। अर्थात ज्ञानार्जन करना। इस प्रकार शिक्षा ज्ञानार्जन की एक सतत प्रक्रिया है। अंग्रेजी भाषा में इच्छा का आशय ‘Education’ से है या शब्द लैटिन भाषा के Educatum से बना है। जिसका अर्थ है आंतरिक रूप से आगे बढ़ना। इस प्रकार शाब्दिक अर्थ की दृष्टि से, “बालक की आंतरिक शक्तियों, प्रतिभाओं, और क्षमताओं को बाहर की ओर निखार कर विकसित करना शिक्षा है।”

शिक्षा की परिभाषाएं :-
भारतीय विद्वानों द्वारा प्रस्तुत शिक्षा का अर्थ व परिभाषाएं निम्नलिखित है –

महात्मा गांधी :– ” शिक्षा से मेरा अभिप्राय बालक और मनुष्य के शरीर, मन और आत्मा में निहित सर्वोत्तम शक्तियों के उद्घाटन से है”

रवींद्रनाथ टैगोर :- ” इच्छा का अर्थ है मस्तिष्क को इस योग्य बनाना है कि वह चिरंतन सत्य को पहचान सके, इसके साथ एकरूप हो सके और उसे अभिव्यक्त कर सके”

स्वामी विवेकानंद :- ” मनुष्य में निहित परिपूर्णता का उद्घाटन करना ही शिक्षा है। मनुष्य के भीतर ही ज्ञान है, बाहर से कोई ध्यान नहीं दिया जा सकता है”

अरस्तु :- ” शिक्षा का अर्थ है स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन का निर्माण करना”

प्लेटो :- ” शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास की प्रक्रिया ही शिक्षा है”

शिक्षा की विशेषताएं :-

  • शिक्षा जीवन पर चलने वाली सतत प्रक्रिया है।
  • शिक्षा बालक के विकास में चलने वाली  त्रिमुखी प्रक्रिया है।
  • यह सामाजिक विकास की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जिसमें शिक्षक, समाज, पाठ्यक्रम और विद्यार्थी शामिल होते हैं।
  • शिक्षा की प्रक्रिया में बालकों के आंतरिक गुणों का विकास एवं प्रकाशित होती है।

शिक्षा की प्रमुख आवश्यकताएं :-

  • लोकतंत्र का विकास करना, उसे सुदृढ़ एवं परिपक्व बनाना।
  • आदर्श नागरिकों का निर्माण करना।
  • व्यक्तित्व का बहुमुखी विकास करना, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था एवं समाज के अनुकूल रहे।
  • कुशल नेतृत्व के गुणों का विकास करना।
  • बालक बालिकाओं में राष्ट्रीय गौरव, राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रीय आंदोलन के मूल्यों के फलस्वरूप उत्पन्न त्याग एवं बलिदान की भावनाओं का विकास करना।
  • बालक बालिकाओं की व्यवसाई को योग्यता का विकास करना ताकि देश के विकास में वे अपना समुचित योगदान दे सकें।

आज हम लोग जाने की शिक्षा का अर्थ, परिभाषा, उद्देश्य क्या है ? शिक्षा के बारे में भारत के अलग-अलग विद्वानों ने क्या क्या आपने विचार को दिए।

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