आज के इस लेख में “शिक्षा के चार स्तंभ” से जुड़े चीजों का अध्ययन करेंगे। इस लेख के माध्यम से आप शिक्षा के चार स्तंभ कौन-कौन से है? इसको जानेंगे साथी साथ चारों स्तंभ में बालक किस प्रकार से शिक्षा को ग्रहण करता है इन सारी बातों का अध्ययन करेंगे। तो चलिए सबसे पहले हम लोग जानते हैं कि शिक्षा के चार स्तंभ कौन-कौन से हैं? Four Pillars Of Education In Hindi

शिक्षा के चार स्तंभ कौन-कौन से हैं?

शिक्षा के चार स्तंभ कौन-कौन से हैं? Four Pillars Of Education In Hindiआज विभिन्न क्षेत्रों को वैश्वीकरण की प्रक्रिया प्रभावित कर रही है। वैश्वीकरण शिक्षा को भी काफी हद तक प्रभावित किया है जिसके कारण पूरा विश्व एक गांव के रूप में विकसित हो गया है।
वैश्वीकरण के परिणाम स्वरूप मानव समाज के समक्ष अनेक चुनौतियां उपस्थित हो गई है इन चुनौतियों का सामना सफलतापूर्वक कैसे किया जाए तथा शिक्षा की इस संदर्भ में क्या भूमिका हो सकती है इन सभी विषयों पर विचार के लिए 1991 में यूनेस्को ने एक अंतरराष्ट्रीय आयोग का गठन किया।

जैक्स डीलर इस आयोग के अध्यक्ष थे। आयोग ने 1996 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की जिसका शीर्षक था – Learning The Treasure Within

शिक्षा के चार स्तंभ In Hindi

इसी आयोग ने अपनी इस रिपोर्ट में शिक्षा के चार स्तंभों का उल्लेख किया है। शिक्षा के यह चार अवस्था में वर्तमान परिवेश के संदर्भ में पूरी तरह प्रसांगिक है।

शिक्षा के चार स्तंभ निम्नलिखित है:-

  1. जानने के लिए सीखना
  2. करने के लिए सीखना
  3. अस्तित्व के लिए सीखना
  4. साथ रहने के लिए सीखना

1. जानने के लिए सीखना

ज्ञान जो है वह शिक्षा का एक महत्वपूर्ण अंग है। हमारे चारों ओर के परिवेश में बहुत सी वस्तुएं हैं जिनको जानना आवश्यक है। ज्ञान प्राप्ति एक प्रकार के आंतरिक आनंद को जन्म देती है। यही नहीं यह ज्ञान ही है जो मानव सभ्यता के विकास का आधार है, लेकिन प्रश्न यह उठता है कि सीखा कैसे जाएं शिक्षा का यह स्तंभ Learning To know इस बात से संबंध रखता है। रिपोर्ट में इसके लिए निम्न बातों पर बल दिया गया है:- 

  • व्यक्ति में निरीक्षण शक्ति का विकास किया जाए।
  • व्यक्ति में एकाग्रता विकसित किया जाए ध्यान की एकाग्रता के बिना ज्ञान का अर्जुन करना असंभव है।
  • स्मरण शक्ति का विकास किया जाए इसके लिए पुराने चले आ रहे परंपरागत तरीकों को अपनाया जा सकता है।
  • चिंतन एवं तर्कशक्ति दोनों का विकास किया जाए।

जब व्यक्ति में इन सारी योजनाओं का विकास हो जाता है तो वह है सीख जाता है कि कैसे सीखा जाए। आयोग ने शिक्षा के इस स्तंभ में विज्ञान शिक्षा प्राप्त करने का अवसर उपलब्ध करवाने पर भी बल दिया है, क्योंकि इससे व्यक्ति की उपयुक्त क्षमताओं का विकास में भी मदद मिलती है।

2. करने के लिए सीखना

शिक्षा के पहले स्तंभ का संबंध यदि ज्ञान के साथ है तो इस स्तंभ का संबंध क्रिया के साथ है।

यह व्यक्ति में विभिन्न कौशलों के विकास से जुड़ा है।

करने के लिए सीखना के अंतर्गत निम्नलिखित बिंदुओं पर बल दिया गया है:-

  • शिक्षा द्वारा व्यक्ति में ऐसे कौशलों का विकास किया जाए, जिससे वह अनिश्चित भविष्य के लिए तैयार हो सके।
  • शिक्षा व्यक्ति में ऐसी योग्यता विकसित करें जिससे वह सैद्धांतिक एवं व्यवहारिक ज्ञान में समन्वय कर सके।
  • यह उस में समस्या समाधान निर्णय लेने तथा नवीनतम सामूहिक कौशलों का विकास करें।
  • शिक्षा उसे सृजनात्मक बनाएं।
  • यह बालकों में ऐसी क्षमता का विकास करें जिससे बालक चाहे कहीं नौकरी कर रहा हो या किसी व्यवसाय से जुड़ा हो, किए जाने वाले कार्य को अधिक दक्षता के साथ कर सके।
  • शिक्षा द्वारा उसमें सामाजिक कौशलों का भी विकास में किया जाए।

इस प्रकार यह स्तंभक विद्यार्थियों में कार्य के प्रति निष्ठा पैदा करने प्रत्येक कार्य को दक्षता के साथ करने उसे सुनिश्चित भविष्य में सफलता पूर्वक कार्य करने में सक्षम बनाने का उसमें व्यक्तित्व एवं सामाजिक कौशलों का विकास करने के संबंध रखता है।

3. साथ रहने के लिए सीखना

शिक्षा के इस स्तंभ के अंतर्गत आयोग ने यह चर्चा की है कि सदी में व्यक्तियों मैं हिंसक एवं आत्मघाती प्रवृत्ति बढ़ रही है। सूचना एवं संचार के माध्यम से इस प्रकार की घटनाओं को समाज के समात्र बढ़ा चढ़ाकर प्रस्तुत करते हैं, इससे आपसी संघर्ष बढ़ता हैं शिक्षा का यह स्तंभ इसी विषय से संबंध रखता है कि कैसे लोगों को मिलाजुला कर साथ रहना सिखाया जाए?

साथ रहने के लिए सीखना में निम्न बिंदुओं पर बल दिया गया है:-

  • आजीवन शिक्षा के अंतर्गत सामान परियोजनाओं में लोगों की संलिप्तता को बढ़ाया जाए। इसे आपस में हो रहे झगड़ों को रोकने में मदद मिलेगी।
  • विद्यार्थियों को मानव भूगोल विदेशी भाषाओं व साहित्य की शिक्षा दी जाए।
  • विद्यार्थियों को परस्पर बातचीत एवं परिचर्चा के लिए उपयुक्त मंच उपलब्ध कराया जाए।
  • विद्यार्थियों को इस बात के लिए प्रशिक्षित किया जाए कि वह विश्व को दूसरे के नजरिए से देखें । इससे परस्पर सद्भावना को बढ़ावा मिलेगी।
  • विद्यार्थियों को आरंभ से ही खेल को तथा सांस्कृतिक एवं सामाजिक गतिविधि में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
  • शिक्षा संस्थाओं में अध्यापक व विद्यार्थी सभी मिलकर समान परियोजनाओं पर कार्य करें।

4. अस्तित्व के लिए सीखना

इस संदर्भ में आयोग ने निम्नलिखित बातों पर बल दिया है:-

  • शिक्षा का आधारभूत सिद्धांत यह है कि वह व्यक्ति का पूर्ण विकास करें।
  • शिक्षा व्यक्ति में स्वतंत्र एवं आलोचनात्मक ढंग से चिंतन करने तथा अपने निर्णय स्वयं लेने की योग्यता का विकास करें।
  • शिक्षा उसे इस रूप में तैयार करें कि वह व्यक्ति, एक परिवार, व समाज के सदस्य, एक भविष्य के सृजनशील व्यक्ति तथा तकनीकों के जन्मदाता ग्रुप में अपने व्यक्तित्व को विकसित कर सके।
  • शिक्षा उसे अपनी समस्याओं का खुद समाधान करने एवं अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह करने के योग्य बनाएं।
  • शिक्षा यह भी सुनिश्चित करें कि प्रत्येक व्यक्ति विचारों, भावनाओं, कल्पना एवं निर्णय के संदर्भ में स्वतंत्र हो और अपनी क्षमताओं का पूर्ण विकास कर सके।

आज के इस लेख में आपने शिक्षा के चार स्तंभ (Four Pillars Of Education) को जाना।

मैं उम्मीद करता हूं कि यह लेख आपको पसंद आई होगी तथा यह आपके लिए उपयोगी भी होगा। इसी तरह के अन्य लेख को पढ़ने के लिए पढ़ते रहिए…..RKRSTUDY.NET

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