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सामाजिक अध्ययन/विज्ञान क्या है? सामाजिक अध्ययन का अर्थ, अवधारणा, प्रकृति एवं महत्व।

सामाजिक अध्ययन/विज्ञान क्या है? सामाजिक अध्ययन का अर्थ, अवधारणा, प्रकृति एवं महत्व।

CTET SST PEDAGOGY NOTES:- सामाजिक अध्ययन/विज्ञान क्या है? सामाजिक अध्ययन का अर्थ, अवधारणा क्या है? सामाजिक अध्ययन का महत्व एवं प्रकृति क्या है?

सामाजिक अध्ययन/विज्ञान का अर्थ

सामाजिक अध्ययन का शाब्दिक अर्थ होता है-समाज का अध्ययन करना। सामाजिक अध्ययन अपने आप में एक व्यापक शब्द है, जिसमें समाज के सभी पक्ष शामिल होते हैं। सामाजिक अध्ययन में समाज के आर्थिक, धार्मिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक आदि पक्षों का अध्ययन किया जाता है।

सामाजिक अध्ययन की परिभाषा

विज्ञान की वह शाखा जिसके अंतर्गत किसी समाज के आर्थिक, राजनीतिक, संस्कृतिक इत्यादि पक्षों का अध्ययन किया जाता है, उसे सामाजिक अध्ययन करते हैं।

कोलम्बिया एनसाइक्लोपीडिया के अनुसार-सामाजिक अध्ययन से तात्पर्य अध्ययन के उन क्षेत्रों से है जो मानव मात्र को उनके सामाजिक संबंध के संदर्भ में समझाने में सहायता करता है।

सामाजिक अध्ययन की अवधारणा एवं प्रकृति

  • सामाजिक अध्ययन की अवधारणा निरंतर गतिशील है। प्रारंभ में सामाजिक अध्ययन को इतिहास का ही अंग माना जाता था। परंतु बाद में इसे इतिहास, भूगोल, नागरिक शास्त्र, अर्थशास्त्र जैसे विषयों में विभाजित किया गया है।
  • आधुनिक समय में सामाजिक अध्ययन में सहसंबंधित का विकास हुआ है। इसके अनुसार सामाजिक अध्ययन के विषय अलग-अलग होते हुए भी एक दूसरे से संबंधित है।
  • वर्तमान समय में सामाजिक अध्ययन की नई पाठ्य पुस्तकों को विषय वस्तुओं के अनुसार क्रमबद्ध किया गया है। जो जहां तक संभव हो विषय क्षेत्रों में अंतर संबंध स्थापित करती है।
  • सामाजिक अध्ययन शिक्षण के उद्देश्य एवं महत्व
  • सामाजिक अध्ययन के शिक्षण से प्रजातांत्रिक भावना का विकास होता है।
  • इस विषय के अध्ययन से राष्ट्रीय एकता, स्वदेश प्रेम की भावना, विश्व बंधुत्व एवं अंतर्राष्ट्रीयता की भावना का विकास होता है।
  • सामाजिक अध्ययन के शिक्षण से जीविका-उपार्जन, व्यवसाय, कृषि तथा उद्योग संबंधी कार्यों के बारे में जानकारी मिलती है।

सामाजिक अध्ययन/विज्ञान क्या है?

N.C.E.R.T के अनुसार सामाजिक अध्ययन शिक्षण के उद्देश्य

  • सामाजिक तथ्यों एवं सिद्धांतों का बोध कराना तथा सामाजिक तथ्य, सिद्धांत, नियमों, प्रत्यय व अवधारणा के द्वारा दैनिक जीवन की समस्याओं के हल संबंधी बोध कराना।
  • छात्रों में अपेक्षित कौशल का विकास कराना तथा सामाजिक विज्ञान शिक्षण द्वारा रूचि, अभिरुचि व मूल्यों आदि गुणों का विकास कराना।
  • सामाजिक अध्ययन प्राचीन काल के जीवन का विवरण ही नहीं देता परंतु वर्तमान समय में उसकी प्रासंगिकता बताता है। अतः वर्तमान समय में सामाजिक अध्ययन की शिक्षण काफी महत्वपूर्ण है।
  • सामाजिक अध्ययन स्वतंत्र चिंतन शक्ति के विकास में सहायक होता है।
  • यह विषय समाज एवं पर्यावरण का अंत: संबंधीय अध्ययन पर बल देता है।
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