वृद्धि एवं विकास को प्रभावित करने वाले कारक कौन-कौन से हैं? CTET, REET, UPTET

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आज क्या हमारा Topic है “वृद्धि एवं विकास को प्रभावित करने वाले कारक”। हम लोग इस लेख में उन सभी कारकों का अध्ययन करेंगे जो वृद्धि और विकास को प्रभावित करते हैं।

प्रभावित का मतलब यहां पर यह है कि वृद्धि तथा विकास की जो सामान्य गति होती है उसमें या तो कमी आ जाती है या उस गति में वृद्धि आ जाती हैं। अर्थात वृद्धि या विकास की गति में कमी हो या बढ़ोतरी हो दोनों ही स्थिति में हम कहेंगे कि वृद्धि और विकास प्रभावित हुआ है।

अब हम बात करेंगे कि वह कौन कौन से कारक हैं जो वृद्धि एवं विकास को प्रभावित करते हैं।

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वृद्धि एवं विकास को प्रभावित करने वाले कारक मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं:-

1. अनुवांशिकी या वंशानुगत कारक (Genetic Factors)
2. वातावरणीय कारक (Environmental Factors)

वृद्धि एवं विकास को प्रभावित करने वाले वंशानुगत कारक

प्रत्येक व्यक्ति का शारीरिक बनावट, लंबाई, रंग रूप तथा गुण एक दूसरे से अद्वितीय होता है। यह वंशानुक्रम से प्रभावित होता है। माता पिता के गुण, रंग रूप, शारीरिक बनावट जिस प्रकार के होते हैं उनके संतान में भी उसी प्रकार की देखी जाती है। अतः इस प्रकार से हम कह सकते हैं कि वृद्धि एवं विकास को वंशानुगत प्रभावित करता है।

वृद्धि एवं विकास को प्रभावित करने वाले वातावरणीय कारक

वातावरण संबंधी अनेकों ऐसे कारक हैं जो बालक की वृद्धि और विकास को प्रभावित करता है। उन कारकों में से कुछ प्रमुख कारक निम्नलिखित है:-

जन्म से पूर्व का वातावरण

गर्भधारण से लेकर बालक के जन्म से पहले का काल होता है उसमें जो बालक का वृद्धि और विकास होता है वह माता के स्वास्थ्य, पोषक आहार एवं उसके मानसिक स्थिति पर निर्भर करता है। इसमें कमी होने पर बालक की वृद्धि और विकास भी प्रभावित होता है।

घर एवं आस पड़ोस का वातावरण :-

घर एवं आस पड़ोस का वातावरण भी बालक के वृद्धि एवं विकास को प्रभावित करता है। यदि घर एवं आस पड़ोस का वातावरण अच्छा हो तो बालक का समुचित विकास होता है और यदि घर एवं आस-पड़ोस का वातावरण खराब हो तो बालक का विकास पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

परिवार के सदस्यों का व्यवहार :-

बालक में अनुकरण करने की प्रवृत्ति पाई जाती है। इसीलिए वह किसी भी लोग को जिस प्रकार से कुछ भी करते हुए देखता है वह उसका अनुकरण करता है। परिवार के सदस्य यदि अच्छे शब्दों एवं अच्छे व्यवहार का पालन करते हैं तो बालक में भी इसी प्रकार की गुण पाया जाता है।

पोषण

पोषण वृद्धि तथा विकास के लिए महत्वपूर्ण घटक है। यदि बालों को उचित मात्रा में पोषक पदार्थ नहीं मिलती है तो बालक का वृद्धि और विकास रुक जाता है।

लिंग

लिंग भी बालक की वृद्धि और विकास में अहम भूमिका निभाता है। सामान्यतया ऐसा देखा जाता है कि किसी अवस्था में विकास की गति लड़कियों में तीव्र होती है तो किसी अवस्था में लड़कों में विकास की गति तीव्र होता है।

खेल एवं व्यायाम

खेल एवं व्यायाम विकास एवं विधि का अहम अंग है। यदि कोई बालक नियमित खेल एवं व्यायाम करता है तो उसका विकास अच्छी गति से होता है।

अन्य कारक

उपरोक्त कार्य के अलावा भी कुछ ऐसे कारक हैं जो वृद्धि एवं विकास को प्रभावित करता है। जैसे:- दोषपूर्ण सामाजिक रीति रिवाज, परिवार की आर्थिक दशा, जलवायु, दुर्घटना, रोग इत्यादि।

आज के लेख में हम लोगों ने अध्ययन किया कि वृद्धि तथा विकास को प्रभावित करने वाले कारक कौन-कौन से हैं। हम लोगों ने वृद्धि तथा विकास को प्रभावित करने वाले वातावरणीय कारक एवं वंशानुगत कारक का भी अध्ययन किया। मैं उम्मीद करता हूं कि यह लेखआपको पसंद आई होगी तथा यह आपके लिए उपयोगी भी होगा। इसी तरह के अन्य लेख को पढ़ने के लिए पढ़ते रहिए…..RKRSTUDY.NET

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